कुछ ख्वाबो कि राख
आज एक पुरने डब्बे मे मिली
नर्म गुलाबि धागे से बाँधे
कुछ पंनेँ
और उन्पर नीली स्याही से लिकखे हुए
कुछ नग्मे
आँख से टप्कते अश्कोण के सूखे धब्बे ,
और मुर्झये हुए पूलोँ के कुछ बिख्रे काटे
सफेद कागाज़ पर पिरोए कुछ सुनहरे मोती
कुछ खाट जो उसने मुझे लिकखे थे कभी
एक कोणे मे चाँदी कि एक तानह पायल
और एक काढे हुए रुमाल मे दो सुरख लबो के निशा
इन क़तल हुए ख्वाबोन मे ज़िन्दा है कुछ अबभि
इक भीणी सि खुशबू
कुछ तेज़ धारकने
और बन्द आँखो के पीछे
ईक् प्यार कि नामी .
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