क्यूँ दूरियाँ घट ती नहीं
क्यूँ फ़ासले सिमट ते नहीं
बेचैनियाँ बदती रही,हैरानीयाँ थमती नहीं
क्यूँ जाम गयी आँखें मेरी
उन्न रास्तों पे,तू जिनपे चली
कंधे पे क्यूँ महसूस हो
हाथ तेरा,
तुम्हे जलाए थे जो दिए
मैने कभी ना,बुज्जाने दिए
दिए जाग रहे, हम जी रहे
मिले राहों में तू, कभी ना कभी
क्यूँ दूरियाँ घाट ती नहीं, क्यूँ फ़ासले सिमट ते नहीं
बेचैनियाँ बदती रही, हैरानीयाँ थमती नहीं
क्यूँ दूरियाँ घाट ती नहीं, क्यूँ फ़ासले सिमट ते नहीं
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