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Friday, November 25, 2011

Ek Pari..

तुम परी हो,अक्सर मेरे ख्वाबो में आती हो
हो तकलीफ़- बिछड़ने का गम, फिर भी मुस्कुराती हो
किसी से कुछ कहती नही और दर्द को छिपाती हो,
खुद जो समझ पाती नही औरो को समझाती हो.
महसूस हो जाता मुझको जो ना तुम दिखती हो,
उतना करीब ही पता हू में, जितना दूर तुम जाती हो.
हर लम्हा ख्यालो में तुम,जोश उमंग ही लाती हो,
मौत से तुम डरती नही पर जिंदगी से घबराती हो.
दुनिया से मिलती हो फिर भी मुझसे तुम शरमाती हो,
खुशियो को बाँटा है तुमने, गुम ही क्यू अपनाती हो.
तुम पवन हो तुम चंचल हो, गीत प्यार के गाती हो,
तुम हरपल मुस्कुराओ, सबकी दुआ कमाते हो.
पूजता हू हर पल तुमको, ऐसे भाव जागती हो.
दुख मे कैसे खुश रहना है, सबको ये शिखलाती हो...

You & her

You may not be her first, her last or her only,
She loved before she may love again.
But if she loves you now, what else matters ?
She's not perfect, you aren't either.
And the two of you may never be perfect together,
but if she can make you laugh, cause you to think twice,
and admit to being human and making mistakes,
hold onto her and give her the most you can.
She may not be thinking about you every second of the day,
But she will give you a part of her that she knows you can break,
-her heart.
So don't hurt her, don't change her, don't analyze and don't expect
more than she can give.
Smile when she makes you happy,
let her know when she makes you mad.
and miss her when she's not there....

Tuesday, June 28, 2011

अजब पहेली है ये रिश्‍ते

अजब पहेली है ये रिश्‍ते,
पल पल ये बदलते रिश्‍ते,
कभी इस मन कभी उस मन जुरते,
कभी इक पेहचान को जुझते,
कभी गुमनामी मे कलप्ते,
ये रिश्‍ते ना मांगे धन,
मांगे तो बस अपनापन,
वक़त बदला रिश्‍ते बदले,
अपनापन तो बस अब मिथ्या...

Tuesday, June 7, 2011

ये साए हैं

ये साए हैं , दुनिया की परछाइयों की
भरी भीड़ में , खाली तनहाइयों की
यहाँ कोई साहिल - सहारा नहीं है
कहीं डूबने को किनारा नहीं है
बहुत हमने चाहा ज़रा नींद आये
यहाँ सारे चेहरे हैं मांगे - हुए - से
निगाहूँ में आंसू भी टाँगे - हुए से
बड़ी नीची राहें हैं उचाइयों की
ये साए हैं , दुनिया की परछाइयों की
भरी भीड़ में , खाली तनहाइयों की...

Monday, May 9, 2011

वक्त की शाख

वक्त की शाख से तोड़ कर रखे थे कुछ लम्हे
तुम भी कुछ उलझे रहे हम भी कुछ मसरूफ रहे.
अब तो आ जाओ…..
ये लम्हे अब सूख रहे है.

सूखे पत्ते

पेड के इर्द-गिर्द पड़े ये सूखे पत्ते,
कभी बड़ी शान से ऊँचे दरख़्त पर इठलाते थे,
हवा के हर झोखे के संग झूमते-बलखाते थे,
ओस की बूँदो से नहाते, चिड़िया से बाते करते थे!!
कभी यौवन से परिपूर्ण, परिवेश की शान थे,
अपने पेड़ के पालनहार, उसकी अनूठी पहचान थे,
सूरज की तेज धूप से बचाते,खुद जल जाते थे,
अपने पेड़ की खातिर ,आँधी से लड़ जाते थे!!
आज बेबस बेजान ,बेमतलब से लगते है,
ललचाई नज़रो से अपने आशियाने को तकते है,
आज इनकी जगह कुछ नये पत्तो ने ले ली है,
इनके साथ तो इनकी तन्हाई भी अकेली है!!
अपने घर के आँगन पे बैठा ये बुजुर्ग,
कुछ- कुछ इन सूखे पत्तो सा लगता है,
जिस घर को अपने खून से सीचा था,
आज उसकी चौखट पे बैठा सूखे पत्ते सा दिखता है!!

Thursday, May 5, 2011

एक जिंदगी

अधूरी कहानी बयां करती पूरी एक जिंदगी,
खुशियों की चाह लिए गम में डूबी एक जिंदगी,
अपने वजूद को तलाशती एक जिंदगी,
गुमनामियों के भंवर में भटकती जिंदगी,
ख्वाहिशों की चादर तले सिमटती जिंदगी,
सुलझनों की चाह में उलझती एक जिंदगी,
जीने की चाह में दम तोडती एक जिंदगी