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Friday, November 25, 2011

Ek Pari..

तुम परी हो,अक्सर मेरे ख्वाबो में आती हो
हो तकलीफ़- बिछड़ने का गम, फिर भी मुस्कुराती हो
किसी से कुछ कहती नही और दर्द को छिपाती हो,
खुद जो समझ पाती नही औरो को समझाती हो.
महसूस हो जाता मुझको जो ना तुम दिखती हो,
उतना करीब ही पता हू में, जितना दूर तुम जाती हो.
हर लम्हा ख्यालो में तुम,जोश उमंग ही लाती हो,
मौत से तुम डरती नही पर जिंदगी से घबराती हो.
दुनिया से मिलती हो फिर भी मुझसे तुम शरमाती हो,
खुशियो को बाँटा है तुमने, गुम ही क्यू अपनाती हो.
तुम पवन हो तुम चंचल हो, गीत प्यार के गाती हो,
तुम हरपल मुस्कुराओ, सबकी दुआ कमाते हो.
पूजता हू हर पल तुमको, ऐसे भाव जागती हो.
दुख मे कैसे खुश रहना है, सबको ये शिखलाती हो...

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